अन्दर ही अंदर पूरा टूट जाता हूं

 अन्दर ही अंदर पूरा टूट जाता हूं

मैं उसकी यादों से अक्सर रुठ जाता हूँ,

ऐ इश्क तबाह करना है तो दोनो को कर

मैं तो हर पल बस उसके छूठ पाता हूं।

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